Wed 25 05 2022
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रिक्शा चालक ने बेरोज़गारी के आगे घुटने टेके, मास्क को बनाया सहारा

रिक्शा चालक ने बेरोज़गारी के आगे घुटने टेके, मास्क को बनाया सहारा

शाजापुर। कोरोना कफ्र्यू की वजह से लगभग सभी तरह के कारोबार पूरी तरह से ठप हो गए हैं। ऐसे में कुछ लोग बेरोजगार होकर घर पर ही बैठ गए हैं, तो कुछ लोगों ने इस मुसीबत की घड़ी में भी उम्मीद की शमा रोशन करते हुए रोजगार का रास्ता निकाल लिया है। शहर के इंदिरा नगर में रहने वाले रिक्शा चालक राकेश सोलंकी की भी यही कहानी है, जिसने मुश्किल की घड़ी में बेरोजगारी से थक कर घूटने टेकने की बजाय कोविड जंग में भूमिका निभाते हुए मास्क निर्माण को अपना रोजगार बना लिया है। पेशे से रिक्शा चालक सोलंकी कोरोना कफ्र्यू के कारण बेरोजगार हो गया और परिवार पर आर्थिक संकट मंडराने लगा, क्योंकि कोविड संक्रमण की वजह से रिक्शा के लिए सवारी मिलना भी कठिन हो गया। राकेश का कहना है कि दो दिनों का कोरोना कफ्र्यू लागू किया गया जिसकी समय सीमा दिनोंदिन बढ़ती ही चली गई है और इसके बाद परिवार पर आर्थिक संकट के बादल भी मंडराने लगे, जिसके चलते उसने मास्क बनाकर उसे बेचने का फैसला किया। सोलंकी ने इसके लिए एक सिलाई मशीन की जुगाड़ की और घर पर ही मास्क बनाना शुरू कर दिया। मास्क बनाने के बाद उसने इसे थोक भाव में बेचने के लिए मेडिकल स्टोर्स सहित अन्य छोटे-बड़े व्यापारियों से संपर्क किया। महामारी से लडऩे के लिए हर व्यक्ति को मास्क पहनना अनिवार्य है इस कारण व्यापारियों ने थोक दाम पर मास्क लेना शुरू कर दिया। राकेश बताता है कि धीरे-धीरे मास्क की डिमांड बढऩे लगी जिसके बाद उसने दो और सिलाई मशीनें खरीदी और परिवार के सदस्य भी मास्क बनाने में मदद करने लगे। राकेश अब शहर में करीब 10 व्यापारियों को प्रतिदिन 300 मास्क उपलब्ध कराता है, जिसकी वजह से उसे हर दिन करीब 500 से 600 रुपए तक आमदनी हो जाती है। मास्क की डिमांड बढऩे से परिवार का विपदा के समय में भी सही ढंग से भरण-पोषण आसानी से हो रहा है।

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