Fri 20 05 2022
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प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 53वां स्मृति दिवस, भंडारे का हुआ आयोजन

प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 53वां स्मृति दिवस, भंडारे का हुआ आयोजन

शाजापुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव वरदानी धाम हरायपुरा में संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 53वां स्मृति दिवस विश्व शांति दिवस के रूप में मंगलवार को मनाया गया। कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माबाबा के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी पूनम बहन ने कहा कि दादा लेखराज सिंध हैदराबाद के रहने वाले थे और वे हीरे जवाहरात के सफल व्यापारी थे। वर्ष 1936 में उन्हें शिव परमात्मा द्वारा दिव्य साक्षात्कार कराए गए तथा ईश्वरीय प्रेरणा अनुसार उन्होने अपना सारी चल अचल संपत्ति और हीरे जवाहरात का कारोबार मानव जाति के कल्याण हेतु ईश्वरीय सेवा में कर दिया। उन्होने महिलाओं की एक ट्रस्ट बनाई और अपनी सारी संपत्ति ट्रस्ट के नाम कर दी। उन्होंने सन् 1936 में जब संसार में चारों ओर महिलाओं पर अत्याचार हो रहे थे तब उन्होने नारी जाति के लिए संस्थान का उद्घाटन किया और संस्थान का संचालन का कारोबार महिलाओं को सौंप दिया। उन्होने चरित्र निर्माण एवं मानव जीवन में मूल्यों को सींच कर एक नया इतिहास रचा, जिसका चैतन्य उदाहरण आज ब्रह्माकुमारी संस्थान है जो एक वट वृक्ष की भांति संपूर्ण विश्व के 140 से भी अधिक देशों में 10, 000 से अधिक शाखाओं द्वारा मानव जाति के कल्याण एवं चरित्र निर्माण हेतु कार्यरत है। वर्तमान में माउंट आबू राजस्थान में संस्थान का अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय है।
वहीं ब्रह्माकुमारी चंदा बहन ने मौजूद लोगों को राजयोग के बारे में विस्तार से समझाया कि किस प्रकार से राजयोग के माध्यम से सारे विश्व के वायुमंडल को शुद्ध एवं शांत सुखमय बनाया जा सकता ह। उन्होने कहा कि हमारे मन के द्वारा किए गए संकल्प एवं हमारी भावना ही सृष्टि का नवनिर्माण करते हैं। हम जैसा सोचते हैं वैसा ही वायुमंडल हमारे चारों और बन जाता है और उसी का परिणाम हम आत्माओं के सामने कर्म फल के रूप में आता है। इसलिए हमेशा हमें शुद्ध संकल्प एवं सभी के प्रति शुभ भावना रखनी चाहिए, क्योंकि जैसा हम दूसरे को देंगे वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा। कार्यक्रम में अंबाला से आईं ब्रह्माकुमारी पुष्पावती बहन ने जो 85 वर्ष की उम्र में भी स्वस्थ हैं, उन्होने अपने स्वास्थ्य का श्रेय राजयोग को दिया। उन्होने कहा कि मैं प्रतिदिन राजयोग का अभ्यास करती हूं और आज मन एवं तन से तंदुरुस्त हूं, क्योंकि राजयोग से हमें मनोबल बढ़ाने की शक्ति मिलती है, हमारा आत्मबल बढ़ता है और मन का प्रभावित तन पर पड़ता है। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ममता बहन ने सभी को कामेंट्री द्वारा राजयोग का अभ्यास करवाया तथा ईश्वरीय स्मृति का एक गीत सुनाया। ब्रह्माकुमार दीपक भाई ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की दिव्य स्मृति को आज विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में ब्रह्मा भोज का आयोजन किया गया।

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