Tue 28 06 2022
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बिक गई 3 करोड़ की साख 3 हजार में, अब षड़ियंत्र का बहाना

बिक गई 3 करोड़ की साख 3 हजार में, अब षड़ियंत्र का बहाना

शाजापुर। सरकार से तनख्वा के रूप में मोटी रकम लेने के बाद भी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निवर्हन नही करते हुए आमजन से रिश्वत की मांग करने वाले रिश्वतखोर पटवारी लोकायुक्त पुलिस के हत्थे चढ़ गया और उज्जैन की टीम ने फरियादी से रिश्वत लेते आरोपी पटवारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। शाजापुर जिले में वर्षों से पदस्थ पटवारी आत्मराम धानुक को लोकायुक्त पुलिस उज्जैन की टीम ने रिश्वत लेते रंगों हाथों शुक्रवार दोपहर को पकड़ लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम गिरवर में रहने वाले योगेश पिता महेशप्रसाद पाटीदार 26 वर्ष की शाजापुर के महूपुरा में भूमि है जिसका नामांतरण 08 मार्च 2022 को तहसीलदार शाजापुर द्वारा आवेदक के नाम से किया गया था, लेकिन उक्त आदेश में त्रुटिवश 2000 वर्ग फीट भूमि की जगह 2000 वर्ग मीटर लेख कर दिया गया था। उक्त त्रुटि सुधार हेतु ग्राम महूपुरा के हल्का पटवारी आत्माराम धानुक द्वारा आवेदक योगेश पाटीदार से 3000 रुपए बतौर रिश्वत के रूप में मांगे जा रहे थे। पटवारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत फरियादी ने लोकायुक्त उज्जैन से की जिस पर पटवारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की रिकार्डिंग लोकायुक्त द्वारा की गई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से पटवारी को रिश्वत की राशि दिया जाना तय किया गया और शुक्रवार को पटवारी के कार्यालय पर आवेदक केमिकल लगे रुपए देने पहुंचा। पटवारी ने जैसे ही केमिकल लगे नोट लिए उसे लोकायुक्त की टीम ने दबोच लिया। लोकायुक्त टीम ने पटवारी के हाथ धुलाए जिससे पानी रंगीन हो गया। लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी पटवारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे मुचलके पर जमानत देकर छोड़ा। पटवारी को रिश्वत लेते पकडऩे में उप पुलिस अधीक्षक राजकुमार सर्राफ, सुनील तालान, आरक्षक अनिल अटोलिया, हितेश ललावत, संजय पटेल, सुनील परसाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अब हो सम्पत्ति की जांच-
जानकार सूत्रों से मिलि जानकारी के अनुसार पटवारी धानुक के द्वारा अपने रिश्तेदारों के नाम से काफी सम्पत्ती अजिर्त की गई है। मध्यप्रदेश में अभी कई जगह लोकायुक्त की टीम द्वारा रिश्वतखोरों की धड़पकड़ धड़ल्ले से की जा रही है ऐेसे में इनके पास पदस्थ समय से नौकरी की तन्ख्वाह के अतिरिक्त आय पाई गई है। कई ऐसे मामले हैं जिनमें परिवार के सदस्यों के नाम से सम्पत्ति जोड़कर ऐश करने जैसे मामले सामने आए है। यदी सत्यता से जांच की जाए तो कई चल-अचल सम्पत्ति सामने आएगी।
षड़ियंत्र का बहाना-
पटवारी धानुक के संबंध में कुछ का अपना तर्क है कि षड़ियंत्र करके उन्हे फसाया गया है यदि तो केवल विचारणीय प्रश्न यही है कि जिस प्रकार रिश्वत लेना कानूनी अपराध है उसी प्रकार देना भी कानूनन अपराध है ‘‘तो पटवारी महोदय को जब रिश्वत की पेश्कश की गई तो उन्होने पुलिस को खबर कर कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले पर एफ.आई.आर. दर्ज क्यों नहीं करवाई।’’

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