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इक्कीसवीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

इक्कीसवीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

– एनएसपी के इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर आनंद नागर ने एसएमडीसी के सदस्यों एवं शिक्षकों को प्रशिक्षण देते हुए कहा

शाजापुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इक्कीसवीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारे देश के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करना है और यह नीति भारत की परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार को बरकरार रखेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्कूल शिक्षा के परिचय की भूमिका गणित शिक्षक श्यामसुंदर पाटीदार ने कार्यशाला सह उन्मुखीकरण में शिक्षक की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक वास्तव में बच्चों के भविष्य को आकार देते ही हैं हमारे राष्ट्र के भविष्य का भी निर्माण करते हैं। इनके योगदान के कारण ही भारत में शिक्षक समाज के सबसे ज्यादा सम्मानित है।
यह बात एसएमडीसी एवं शिक्षकों के प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला में एनएसपी के इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर आनंद नागर ने एसएमडीसी के सदस्यों एवं शिक्षकों को प्रशिक्षण देते हुए कहीं। रविवार को समीपस्थ ग्राम लड़ावद स्थित शासकीय नवीन हाई स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के संबंध में एसएमडीसी एवं शिक्षकों का प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए श्री नागर ने कहा कि उन्होंने कहा कि अपने विद्यार्थियों को निर्धारित ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्य प्रदान करने के लिए समाज शिक्षक या गुरुओं को उनके जरूरत की सभी चीजें प्रदान करता था। शिक्षा पर पिछली नीतियों का जोर मुख्य रूप से शिक्षा तक पहुंच के मुद्दों पर ही था। 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति जिसे 1992 में संशोधित किया गया था, के अधूरे काम को इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा पूरा करने का भरपूर प्रयास किया गया है। पहले की शिक्षा नीति मैं शिक्षा की गुणवत्ता, भर्ती पदस्थापना, सेवा शर्तें और शिक्षकों के अधिकारों की स्थिति वैसीनहीं थी जैसी होनी चाहिए थी और इसके परिणाम स्वरूप शिक्षकों की गुणवत्ता और उत्साह वांछित मानकों को प्राप्त नहीं कर पाता है, इसलिए अब शिक्षकों के लिए उच्चतर दर्जा और उनके प्रति आदर और सम्मान के भाव को पुनर्जीवित करना होगा, ताकि शिक्षण व्यवसाय में बेहतर लोगों को शामिल करने हेतु उन्हें प्रेरित किया जा सके।
अकुशल कामगारों की जगह मशीनें कर रही काम
श्री नागर ने कहा कि ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है बिग डाटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक और विश्व भर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेगी और दूसरी तरफ डाटा साइंस, कंप्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और मांग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हो। श्री नागर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा भोजन पानी स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, कृषि, जलवायु, विज्ञान और समाज विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के कारण बढ़ते अनेक संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक सीखने की आवश्यकताओं को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की मांग बढ़ेगी क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
विभिन्न विषयों पर दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के अगले सत्र में शिक्षक शंकरलाल सोलंकी ने प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान, ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या कम करना और सभी स्तरों पर शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना विषयों पर प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला के अंतिम सत्र में शिक्षक आनंद नागर ने समतामूलक और समावेशी शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा और जीवन पर्यंत सीखना, भारतीय भाषाओं, कला और संस्कृति के संवर्धन, प्रौद्योगिकी का उपयोग एवं एकीकरण, ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा प्रौद्योगिकी का न्याय सम्मत उपयोग सुनिश्चित करना विषय पर एसएमडीसी के सदस्य गण एवं शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन हेतु कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा क्षेत्र में निजी परोपकारी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने और समर्थन करने की अनुशंसा करती है। इसके लिए हमारी संस्था शैक्षणिक अनुभवों को बढ़ाने के लिए निजी परोपकारी संसाधन जुटाने की दिशा में पहल करेगी। प्रशिक्षण सह कार्यशाला के पूर्व एसएमडीसी सदस्यों शिक्षकों एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा संस्था परिसर में वृक्षारोपण किया एवं प्रशिक्षण उपरांत जलपान एवं चाय पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यशाला में शिक्षकगण श्यामसुंदर पाटीदार, शंकरलाल सोलंकी, ओंकार सिंह सोलंकी, मनीष नागर, अरुण सोलंकी एवं सदस्यगण, ग्राम के गणमान्य नागरिक संतोष सिंह पंवार, मनोहरलाल पाटीदार, दौलत सिंह, उदयसिंह, ओमजी नागर, घनश्याम नागर, देवीसिंह राजपूत, गोपाल राजपूत, भादरसिंह आदि सदस्यगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर 137 विद्यार्थियों को उपसरपंच संतोषसिंह पंवार द्वारा स्वेटर दिए जाने की घोषणा की।

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