Sun 15 05 2022
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37 साल की उम्र में 70 से अधिक बार रक्तदान कर चुके समाजसेवी अभिषेक जैन

37 साल की उम्र में 70 से अधिक बार रक्तदान कर चुके समाजसेवी अभिषेक जैन

शाजापुर। आज विश्व रक्तदान दिवस है और इस दिन जिलेभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन रक्तदान करने वालों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हे किसी दिन की नही बल्कि हरपल लोगों की मदद की चिंता रहती है और वे समय-समय पर रक्तदान करते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं शाजापुर के भंसाली मोहल्ला में रहने वाले अभिषेक जैन जो हर तीन माह में रक्तदान कर लोगों की जान बचाने में अपनी भूमिका निभाते हैं। अभिषेक का कहना है कि मेरे रक्त के कतरे से यदि किसी को जीवन मिल सकता है तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है। 37 साल के अभिषेक अब तक करीब 70 बार रक्तदान कर चुके हैं। शासकीय कांट्रेक्टर होने के साथ-साथ अभिषेक समाजसेवी भी हैं और वे समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यही कारण है कि कोरोना काल में जरूरतमंदों को भोजन कराने वाले अभिषेक लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान भी करते हैं। शाजापुर के भंसाली मोहल्ला में रहने वाले अभिषेक बताते हैं कि उन्होने कारगिल युद्ध में पहली बार रक्तदान किया था। जैन ने बताया कि जब वे सागर जिले के स्कूल में पढ़ाई करते थे तब उन्हे बताया गया था कि कारगिल युद्ध के दौरान सेना में कई जवान गंभीर घायल हो गए हैं और सागर में मिलेट्री का हॉस्पिटल भी है जहां से घायलों सैनिकों के लिए रक्त की आपूर्ति की जा रही है, जिस पर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों के खातिर उन्होने रक्तदान किया और उसके बाद से वे अब हर 3 महीने में रक्तदान करते हैं। अभिषेक ने बताया कि अत्यंत आवश्यकता होने पर उन्होने 2 महीने में भी रक्तदान किया है। कई बार ऐसे बच्चे जिन्हे जन्म के बाद ही रक्त की जरूरत पड़ जाती है उन्हे भी वे रक्त दान करते हैं।
अन्य जिलों में जाकर भी किया रक्तदान
उल्लेखनीय है कि समाजसेवी अभिषेक जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और यही कारण है कि उन्होने नर सेवा के लिए अन्य जिलों में जाने से भी कभी गुरेज नही किया। अभिषेक ने बताया कि उन्होने 70 बार से अधिक बार रक्तदान किया है, जिनमें करीब सात बच्चे भी शामिल हैं। इसीके साथ इंदौर में तीन बार, भोपाल में एक बार और उज्जैन में एक बार जाकर रक्तदान कर चुके हैं। समाजसेवी जैन का कहना है कि रक्त एक ऐसी अमूल्य चीज है जिसे बनाया ही नहीं जा सकता। इसकी आपूर्ति का कोई और विकल्प भी नहीं है। यह इंसान के शरीर में स्वयं ही बनता है। कई बार मरीजों के शरीर में रक्त की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि उन्हें किसी और व्यक्ति से ब्लड लेने की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसी ही इमरजेंसी स्थिति में जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से वे हर तीन माह में रक्तदान करते हैं।

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