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आदिवासी विकास योजनाओं के कम्प्यूटरीकरण की समीक्षा 11 अक्टूबर को


शाजापुर, 09 अक्टूबर 2019/
 आदिवासी विकास योजनाओं के कम्प्यूटरीकरण की राज्य-स्तरीय समीक्षा 11 अक्टूबर को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जायेगी। आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा विभागीय कार्य-प्रणाली और समस्त योजनाओं का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक योजना को ऑनलाइन करने के लिये जल्द ही अलग-अलग मॉड्यूल लांच किये जायेंगे। राज्य शासन ने इस कार्य के लिये 35 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है।

     हितग्राहियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य

आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित आदिवासी विकास की योजनाओं का लाभ लेने के लिये हितग्राहियों को ऑनलाइन पंजीयन कराना जरूरी किया गया है। अब तक 8 लाख 25 हजार हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। हितग्राही किसी भी इंटरनेट कियॉस्क पर जाकर निरूशुल्क पंजीयन करवा सकते हैं। इसके साथ, वेबसाइट <www-tribal-mp-gov-in>  पर लॉग इन कर अथवा मोबाइल एप MPTAAS के जरिये योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और लाभान्वित होने के लिये आवेदन भी कर सकते हैं। इस योजना में हितग्राही को उनके आवेदन की स्थिति के बारे में समय-समय पर एसएमएस के माध्यम से सूचना देने की व्यवस्था भी की गई है।
क्रमांक 93/1756/चन्देलकर

पर्यटकों के लिये 11 शहरों में 12 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक ‘‘सिटी वॉक फेस्टिवल‘‘
शाजापुर, 09 अक्टूबर 2019/
मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा सभी आयु वर्ग के स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिये 11 शहरों में 12 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक ष्सिटी वॉक फेस्टिवलश्श् आयोजित किया जायेगा। फेस्टिवल में कला, संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, इतिहास, हेरिटेज, फूड, टेक्सटाइल, फोटोग्राफी और आध्यात्म आदि विषयों पर 100 से अधिक सिटी वॉक होंगे। प्रत्येक वॉक के लिये स्थानीय वॉक लीडर नियुक्त किया गया है। प्रबंध संचालक, टूरिज्म बोर्ड श्री फैज़ अहमद किदवई ने पर्यटकों से आग्रह किया है कि फेस्टिवल में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर प्रदेश की विरासत से रू-ब-रू हों।
सिटी वॉक फेस्टिवल भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, पन्ना, विदिशा, खजुराहो, चंदेरी, जबलपुर, बुरहानपुर और ओरछा में आयोजित किये जायेंगे। इसमें पर्यटकों को पर्यटन स्थलों की समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सुंदरता, समृद्धशाली इतिहास, परम्पराओं और ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित कराया जायेगा। फेस्टिवल के लिये तारीखवार कैलेण्डर जारी किया जा रहा है। फेस्टिवल में शामिल होने के लिये पर्यटक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपना पंजीयन करवा सकते हैं।
अपर प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्रीमती भावना वालिम्बे ने अधिकारियों को फेस्टिवल के सफल आयोजन के लिये आवश्यक निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि फेस्टिवल पर्यटकों के लिये ज्ञानवर्द्धक और रोचक होगा। इस आयोजन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
क्रमांक 94/1757/चन्देलकर

आजीविका मिशन की महिलाएँ नई दिल्ली फूड कोर्ट में लगाएंगी व्यंजनों के स्टॉल
शाजापुर, 09 अक्टूबर 2019
/मध्यप्रदेश आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों की 6 महिला सदस्य 10 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली के इंडिया गेट पर आयोजित फूड-कोर्ट में लोगों को प्रदेश के परम्परागत व्यंजनों और मिठाईयों के स्वाद से परिचित कराएंगी। ये महिला सदस्य हैं छतरपुर जिले की सुश्री पूनम और सुश्री नीरजा अहिरवार, गुना की सुश्री गंगा अहिरवार, सीहोर की सुश्री रजनी राठौर, जबलपुर की सुश्री हिना खान और सुश्री रजनी वर्मन।
महिला सदस्यों को एम.पी. इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटिलिटी ट्रेवल एण्ड टूरिज्म द्वारा दो चरणों में प्रशिक्षित किया गया है। फूड-कोर्ट का आयोजन भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के सहयोग से छतरपुर, गुना, सीहोर, जबलपुर, रीवा, बड़वानी, भोपाल, इंदौर और सागर जिले में 18 से 27 सितम्बर और 3 से 7 अक्टूबर तक पाक कला और व्यवसायिकता प्रशिक्षण आयोजित किये गये। इसमें 25 स्व-सहायता समूहों की महिला सदस्यों को स्वादिष्ट पारम्परिक व्यंजन, मिठाइयाँ और नमकीन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
क्रमांक 95/1758/चन्देलकर

ईको सिस्टम को संतुलित करने बढ़ाना होगा 6 प्रतिशत वन क्षेत्र
एआईजीजीपीए में व्याख्यान-माला में नेपाल के चीफ पॉलिसी एडवाइजर श्री राठौर
शाजापुर, 09 अक्टूबर 2019/
 राष्ट्रीय स्तर पर ईको सिस्टम को संतुलित करने के लिये वर्ष 2030 तक 6 प्रतिशत वन क्षेत्र बढ़ाना होगा। अविरल और निर्मल नदियों के लिये उनके कैचमेंट एरिया में पौधे लगाना जरूरी है। आईसीआईएमओडी काठमांडू (नेपाल) के चीफ पॉलिसी एडवाइजर श्री बी.एम.एस. राठौर ने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में ‘‘असरदार परिवर्तन-टिकाऊ परिणाम‘‘ व्याख्यान-माला में ‘‘फारेस्ट्री फॉर वेलबीइंग ऑफ पीपुल एण्ड ईकोसिस्टम‘‘ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए यह बात कही।
संस्थान के महानिदेशक श्री आर. परशुराम ने कहा कि हमें वर्तमान के साथ भविष्य के बारे में भी सोचना होगा। उन्होंने कहा कि ‘‘इंकार द्वारा मन बहलाव‘‘ के सिद्धांत पर काम नहीं हो सकता। श्री परशुराम ने कहा कि वर्तमान में क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग महत्वपूर्ण विषय है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन से नई समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिये हम सबको मिलकर कार्य करने की जरूरत है। अगर कार्य आज शुरू करेंगे, तो उसके परिणाम आने वाले दिनों में दिखेंगे।

‘‘रिवर कॉलिंग‘‘ अभियान

श्री राठौर ने कहा कि देश में ष्रिवर कॉलिंगश्श् अभियान चलाने की जरूरत है। इस अभियान को जन-अभियान बनाने पर ही सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में वनीकरण के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। प्रदेश को फिर टाइगर स्टेट का दर्जा मिला है। श्री राठौर ने छिन्दवाड़ा जिले में काराबोह वन के पुनरुद्धार के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि बाँस उत्पादन में किसान स्वयं आगे आ रहे हैं।

वन क्षेत्र में बढ़ें रोजगार के अवसर

श्री राठौर ने कहा कि वन क्षेत्रों के साथ उसके आसपास रहने वाले लोगों का कौशल उन्नयन कर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाया जाना चाहिये। इससे वनों पर उनकी निर्भरता कम होगी। वन समितियों को माइक्रो प्लानिंग के लिये सहयोग करना होगा। श्री राठौर ने अच्छे रहन-सहन (वेल बीइंग) के मुख्य बिन्दुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एक पीरियड हैप्पिनेस विषय का होता है।
संस्थान के प्रमुख सलाहकार श्री मंगेश त्यागी ने विषय-वस्तु की जानकारी दी। व्याख्यान-माला में प्रमुख सलाहकार श्री एम.एम. उपाध्याय, श्री गिरीश शर्मा और अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
क्रमांक 96/1759/चन्देलकर

तोतापरी आम के पौध-रोपण को प्रोत्साहित करने का निर्णय
चयनित किसानों को पौध-रोपण के लिये मिलेगा अनुदान
शाजापुर, 09 अक्टूबर 2019/
प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण को बढ़ावा देने के लिये आम की तोतापरी किस्म के पौध-रोपण को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को राज्य पोषित सघन पौध-रोपण योजना के अंतर्गत तोतापरी आम का अति उच्च सघन पौध-रोपण कराये जाने के बारे में निर्देश जारी किये गये हैं।
योजना के प्रथम चरण में होशंगाबाद, हरदा और बैतूल जिले को शामिल किया गया है। इन जिलों में आम की तोतापरी किस्म को अति उच्च सघनता पद्धति से रोपण करने वाले किसानों को पहले साल 43,200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि प्रदान की जायेगी। पौध-रोपण के लिये ड्रिप पद्धति के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था करना अनिवार्य रहेगा। किसान निर्धारित दरों पर पौधे खरीदने के लिये स्वतंत्र होंगे। अगर कोई किसान पौधों की व्यवस्था करने में असमर्थ रहेगा, तो उद्यानिकी विभाग एम.पी. एग्रो के माध्यम से पौधे खरीदकर उसे उपलब्ध कराएगा। पौधे के मूल्य को भौतिक सत्यापन के बाद अनुदान राशि में समाहित किया जायेगा। इस योजना में किसानों का चयन क्लस्टर बनाकर किया जायेगा। चयनित किसानों को कम से कम एक एकड़ और अधिकतम 5 एकड़ की सीमा तक एक बार अथवा टुकड़ों में योजना का लाभ लेने की पात्रता होगी।

     प्रथम चरण में 1000 एकड़ में अति उच्च सघन पौध-रोपण का लक्ष्य

योजना के प्रथम चरण में वर्ष 2019-20 में होशंगाबाद, हरदा और बैतूल जिलों में कुल एक हजार एकड़ में आम की तोतापरी किस्म का पौध-रोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिये चयनित किसानों को पहले साल में कुल 4 करोड़ 32 लाख रुपये अनुदान दिया जायेगा। दूसरे और तीसरे साल में अनुरक्षण की राशि योजना के प्रावधान अनुसार देय होगी। प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार होशंगाबाद और हरदा जिले में 250-250 एकड़ तथा बैतूल जिले में 500 एकड़ में तोतापरी आम का अति उच्च सघनता से पौध-रोपण कराये जाने का लक्ष्य है। इसके लिये होशंगाबाद और हरदा जिले में 108-108 लाख तथा बैतूल जिले में 216 लाख रुपये अनुदान दिया जायेगा।

किसानों को कराना होगा ऑनलाइन पंजीयन

राज्य पोषित सघन पौध-रोपण योजना में आम की तोतापरी किस्म का वर्ष 2019-20 में अतिउच्च सघन पौध-रोपण कराने के लिये संबंधित जिला कलेक्टर क्लस्टर का चयन करेंगे। क्लस्टर के अंतर्गत शामिल ग्रामों की सूची ऑनलाइन प्रदर्शित की जायेगी। किसानों का पंजीयन ऑनलाइन होगा। यदि कुछ किसान ऑनलाइन पंजीयन नहीं करा सकते हैं, तो उनके आवेदन ऑफलाइन प्राप्त कर वरिष्ठता के आधार पर उनका ऑनलाइन पंजीयन कराया जायेगा। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रति सोमवार योजना की समीक्षा करेंगे। जिला कलेक्टर्स से कहा गया है कि क्लस्टर ग्रामों की सूची विभागीय पोर्टल पर अपलोड करायें।

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