Fri 07 08 2020
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ज्वार के दानों से बैंक में टोने-टोटकों

ज्वार के दानों से बैंक में टोने-टोटकों

शाजापुर। बिना सीजन के अगर कोई वस्तु बाजार में दिखाई दे तो लोग न चाहकर भी उसे खरीद लेते हैं, लेकिन बेसीजन दिखाई दिए ज्वार के दानों ने न सिर्फ बैठक निरस्त करवा दी, बल्कि बैंक में खासा बखेड़ा भी खड़ा कर दिया। इन दानों को कुर्सी पर देखकर संचालक मंडल ने टोने-टोटके की शंका के चलते बैठक का बहिष्कार कर दिया।

दरअसल बुधवार को को-ऑपरेटिव्ह बैंक में बैंक के संचालक मंडल की त्रैमासिक बैठक होना थी। बैठक के समय पर बैंक के संचालक मंडल के सदस्य बैंक के बैठक कक्ष में पहुंच गए। जब सदस्य अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठने के लिए पहुंचे तो उन्हेें वहां ज्वार के दाने दिखाई दिए। एक-एक कर सभी ने अपनी कुर्सियों पर ज्वार के दाने होने की बात कही। तभी किसी ने ये कह दिया कि ज्वार के दाने होना मतलब टोने-टोटके किए गए हैंं और कुछ भी हो सकता है। इतना सुनते ही संचालक मंडल ने बैठक का बहिष्कार कर बैंक में हंगामा खड़ा कर दिया। संचालक मंडल ने इस टोने-टौटके के पीछे कायर्पालन अधिकारी डीआर सरोठिया का हाथ होने का आरोप लगाते हुए नाराजी भी जाहिर की। बैंक के संचालक मंडल के सदस्य दिलीप भंवर ने बताया कि बैंकिंग संस्था पढ़े लिखे लोगों का स्थान होता है, यहां टोने-टोटके का क्या काम। इसके बाद संचालक मंडल के सदस्यों ने बैंक सीईओं को गैर जिम्मेदार बताते हुए टोने-टौटके करने वाला बताया और बैठक नहीं हो सकी।

विवादों से रहा है पुराना नाता

बैंक के सीईओ डीआर सरोठिया ने जब से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में पदभार संभाला है तब से ही वे विवादों में घिरे हुए हैं। गत दिनों भी पेंशनर्स संघ के कमर्चारियों ने सरोठिया की कार्यप्रणाली और व्यवहार को लेकर भूख हड़ताल की थी। पेंशनरों का आरोप था कि बैंक के सीईओ सीधे मुंह बात नही करते और अभद्रता करते हैं। वहीं टीएल बैठक में भी अनुपस्थित रहने की वजह से कलेक्टर श्रीकांत बनोठ से इन्हें नोटिस मिल चुका है। बैंक संचालक मंडल के सदस्य दिलीप भंवर ने बताया कि बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ही नहीं चाहते थे कि बैठक हो। उनके अलावा ये कृत्य कौन कर सकता है। भंवर का आरोप है कि पेंशनर्स संघ के मुद्दे से बचने के चक्कर में सरोठिया ने त्रैमासिक बैठक के पूर्व तंत्र साधना करवाई ताकि जादू टोने के प्रभाव से सदस्य उनके सामने मामले को लेकर चर्चा नही कर सकें।

बैठक कक्ष में भी मिले थे ज्वार के दाने

संचालक मंडल के सदस्य दिलीप भंवर ने बताया कि हम लोग बैठक के समय से पहले ही बैंक पहुंच गए थे ताकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा करना है और क्या चर्चा करना है, लेकिन हमने देखा कि बैठक कक्ष में भी ज्वार के दाने पड़े हुए हैं। जबकि अभी ज्वार का कोई सीजन ही नहीं है। हमरी कुर्सियों पर भी दाने कहां से आ गए। ये हो न हो टोने-टोटकों का ही मामला है।

इनका कहना है….

हमारे एक मिलने वाले का निधन हो गया था तो मैं वहां चला गया था। जब वहां से लौटा तो किसी ने मुझसे इस मामले को लेकर कोई चर्चा नहीं की। ज्वार के दाने किसने और क्यों डाले। इतना पता है कि आज होने वाली बैठक निरस्त हो गई हेै।

– शिवनारायण पाटीदार, को-ऑपरेटिव्ह बैंक-शाजापुर