Mon 25 05 2020
Home / Breaking News / मृत बच्चे को गोद में लेकर घूमते रहे परिजन, हंगामा करने के बाद जिम्मेदारों ने किया डिस्चार्ज
मृत बच्चे को गोद में लेकर घूमते रहे परिजन, हंगामा करने के बाद जिम्मेदारों ने किया डिस्चार्ज

मृत बच्चे को गोद में लेकर घूमते रहे परिजन, हंगामा करने के बाद जिम्मेदारों ने किया डिस्चार्ज

स्वास्थ्य कर्मचारियों पर लापरवाही और भेदभाव का आरोप लगाते हुए परिजनों ने किया हंगामा
शाजापुर। जिम्मेदारों की उदासीनता और सुस्त कार्यशैली के चलते परिजन मृत बच्चे का शव गोदी में लेकर अस्पताल में परेशान होते रहे। इस परेशानी पर भी जब जिम्मेदारों का दिल नही पसीजा तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में भर्ती गर्भवती महिला और उनके परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही और भेदभाव किए जाने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा कर दिया। दो अलग-अलग मामलों में परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों पर अमानवीय व्यवहार किए जाने और समय पर कार्य नही किए जाने का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत कराया। बुधवार को ट्रामा सेंटर में विरोध स्वरूप हंगामा कर रहे ग्राम गुरदाखेड़ी निवासी महिला और उसके परिजनों का आरोप था कि उनके नवजात की मंगलवार रात करीब 2 बजे मौत हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी बुधवार दोपहर 2.30 बजे तक भी उन्हे डिस्चार्ज नही किया गया। चिकित्सकों के पास गए तो उन्होने पर्चा बनाने वाले कर्मचारी के नही होने की बात कहकर डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया। मासूम बच्चे का शव लेकर परेशान होते परिजनों को आखिरकार हंगामा करना पड़ा जिसके बाद मौके पर सिविल सर्जन डॉ शुभम गुप्ता पहुंचे और डिस्चार्ज पर्चा बनवाकर परिजनों को उनके गंतव्य की ओर रवाना किया। वहीं ग्राम सकतखेड़ी के रहने वाले परिवार ने हंगामा करने के पीछे का कारण स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही बताया। सकतखेड़ी के रहने परिवार का कहना था कि वे प्रसव के लिए ट्रामा सेंटर पहुंचे थे, किंतु जिम्मेदारों ने उन्हे कोरोना संक्रमित मरीजों के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया, जिसके बाद वार्ड का हर कर्मचारी उनके साथ अमानवीय व्यवहार कर रहा है।
फेंक कर दे रहे दूध की थैली
हंगामा कर रहे सकतखेड़ी की संतोषबार्ई ने बताया कि प्रसव के लिए परिवार के लोग अस्पताल लेकर आए थे, परंतु जिम्मेदारों ने उन्हे आर्ईसोलशन वार्ड में भर्ती कर दिया। इसके बाद अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों ने उनके साथ बदसलुकी करना शुरू कर दिया। संतोषबाई ने बताया कि उन्हे पानी पीने तक के लिए वार्ड से बाहर जाने की अनुमति नही दी गई। इतना ही नही प्रतिदिन अस्पताल में कर्मचारी द्वारा दूध की थैली और बिस्कुट भी फेंक कर दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से बिना किसी बीमारी के लोग उन्हे कोरोना संक्रमित समझकर भेदभाव कर रहे हैं।
इनका कहना है
सुरक्षा के मद्देनजर रेड जोन से आने वाली गर्भवतियों को आईसोलशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। रही बात दूध और बिस्कुट फेंक कर देने की तो उक्त मामले में शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ शुभम गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल शाजापुर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*