Fri 03 12 2021
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समस्त कानूनों का मूल उद्देश्य अधिकारों की रक्षा करना-न्यायाधीश

समस्त कानूनों का मूल उद्देश्य अधिकारों की रक्षा करना-न्यायाधीश

विश्व मानव अधिकार दिवस पर हुआ ऑनलाइन विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन
शाजापुर। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाजापुर के निर्देशानुसार विश्व मानव अधिकार दिवस के उपलक्ष्य में कालापीपल स्थित शासकीय उत्कृष्ट उमावि में ऑनलाइन प्लेटफार्म गूगल मीट पर विधिक जागरूकता शिविर का अयोजन किया गया। इस दौरान अपर जिला न्यायाधीश रूपम वेदी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि हमारे देश ही नहीं अपितु विश्व में जितने भी कानून हैं सभी मानव अधिकारों एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए है। जहां भी हमारे अधिकारों का हनन होगा वहां हनन करने या कानून का उल्लंघन करने वालों पर विधि अनुरूप कार्रवाई अवश्य होगी, इसलिए यह जरूरी है कि सभी विद्यार्थियों को कानून की जानकारी हो। हमारे देश में यह आम नागरिक की प्रवृत्ति है कि वह सिर्फ अधिकार की बात करता है और कर्तव्य को इतना महत्व नहीं देता जबकि हमारे देश का संविधान हमें अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन करने के लिए भी प्रेरित करता है।  कर्तव्य और अधिकार दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। विद्यार्थियों को मानव अधिकारों हेतु गठित राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं राज्य स्तर पर गठित राज्य मानव अधिकार आयोग के गठन उसके अध्यक्ष, सदस्यों एवं कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। वहीं न्यायाधीश श्रीमती चंचल बुंदेला ने बताया कि दो बार विश्व युद्ध होने से पहले किसी भी देश में मानव अधिकारों पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन दो-दो विश्व युद्ध की पीड़ा सहने के बाद समूचे विश्व के देशों को मानव जाति की रक्षा के लिए 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए मापदण्ड स्थापित कर मानव अधिकारों को उल्लेखित किया गया। इसके साथ ही प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को विश्व मानव अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। चूंकि हमारे देश का संविधान 1949 को बनकर तैयार हुआ एवं 1950 को लागू हुआ तो हमारे देश में विश्व मानव अधिकारों में विहीत मानव अधिकारों को संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में समाहित किया गया। साईबर क्राईम संबंधी कानून की जानकारी देते हुए इंटरनेट के माध्यम से सोशल साईट्स के उपयोग के नुकसान एवं फायदे के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि हमें सोशल साईट का उपयोग केवल अपने ज्ञानवर्धन के लिए करना चाहिए, किसी भी प्रकार के मैसेज या वीडियो को सोच समझकर ही किसी अन्य व्यक्ति को भेजें अन्यथा किसी के द्वारा शिकायत करने पर इसके गलत उपयोग के लिए आपके उपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है जिसमें सजा का भी प्रावधान है। सरकार द्वारा इसके लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। महिलाओं के संरक्षण से संबंधित कानूनों की जानकारी देते हुए बच्चियों को विशेष तौर पर बताया कि आपको किसी भी प्रकार से कोई परेशान कर रहा है, या किसी प्रकार की छोटी-मोटी घरेलू हिंसा हो रही है तो उसकी जानकारी अपने भाई, बहिन, माता-पिता या शिक्षक को अवश्य दें, नहीं तो ऐसी छोटी.छोटी बातें छुपाने से बड़ी घटनाएं घटित हो जाती हैं। जागरूक रहें क्योंकि जागरूकता ही बचाव है।
मानव अधिकार सार्वभौमिक
अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सुरेन्द्रसिंह गुर्जर के निर्देशन में गूगल मीट के माध्यम से पैनल अधिवक्ता एवं पैरालीगल वॉलेंटियर्स, वन स्टॉप सेंटर की ऑनलाईन उपस्थिति में ऑनलाइन वेबीनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पैनल अधिवक्ता इंदरसिंह गामी ने मानव अधिकार दिवस एवं मानव अधिकार के लिए आयोजित हुए विभिन्न सम्मेलनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं न्यायाधीश विष्णु दुबे ने मानव अधिकार आयोग, मावन जीवन में अधिकारों की अनिवार्यता एवं वर्तमान समय में मानव अधिकारों व उनके लिए गठित कमीशनों पर प्रकाश डाला। तहसील विधिक सेवा के कर्मचारी राजकुमार थवानी ने कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्राधिकरण के द्वारा मानव अधिकारों के संरक्षण के क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों के साथ-साथ मानवहितार्थ नालसा एवं सालसा की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाजापुर सचिव सुरेन्द्रसिंह गुर्जर ने इस वर्ष की मानवाधिकार दिवस की थीम फिर से बेहतर, मानव अधिकारों के लिए खड़े हो जाओ  के बारे में बताया। साथ ही दया धर्म का मूल है, धर्म मूल अधिकार का उदाहरण देते हुए कहा कि मानव अधिकार सतत विकास के लक्ष्यों के केन्द्र में है, जिसके बिना कोई व्यक्ति सतत् विकास की आशा नहीं कर सकता।

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