Sat 04 12 2021
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पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का अल्लाह के प्रति समर्पण —ईद उल अजहा   

पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का अल्लाह के प्रति समर्पण —ईद उल अजहा   

ईद उल अजहा के पीछे पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का वह जज्बा है जो अल्लाह की मर्जी से अपने बेटे की कुर्बानी देने तक से नहीं  हिचकता ईद उल अजहा के जरिए अल्लाह इस्लाम के मानने वालों को न्याय कुर्बानी त्याग व हमदर्दी के साथ सच्चाई के सहारे तरक्की के रास्ते पर चलने का हुकुम देते हैं           

ईद उल अजहा पैगंबर हजरत इब्राहिम   अलैहिस्सलाम की खुदा के साथ मोहब्बत वफादारी की शान मैं मनाई जाती है इसका उदाहरण  पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने जिंदगी में पेश किया कुर्बानी मात्र हलाल जानवर के गले पर चाकू फेरने का नाम नहीं है बल्कि दिल से अल्लाह के प्रति समर्पण की भावना है अगर कोई व्यक्ति केवल जानवर के गले पर चाकू चलाता है और उसका दिल इस  से खाली रहता है तो वह नाहक एक बेकसूर जानवर का खून बहता है अल्लाह को उसके खून और गोश्त की कोई जरूरत नहीं उसको सिर्फ ईमान की मजबूती चाहिए कोई दिलचस्पी निजी फायदा कोई लालच डर गरज कोई अंदर की कमजोरी और बाहर की ताकत उसको हक व सच्चाई के रास्ते से डिगा ना सके इसी जज्बात का नाम कुर्बानी अल्लाह के लिए हर संबंध को कुर्बान कर देना है इस्लामी कुर्बानी है आज से हजारों साल पूर्व इस्लाम के पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे पैगंबर हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर दिया था तभी से ईद उल अजहा मनाया जाता है जब लंबी उम्र बीत जाने के बाद भी पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम को कोई औलाद नहीं हुई तो बैतूल मुकद्दस यानी यानी खाना ए काबा की ओर से आप की दुआ अल्लाह ने पूरी की आपके घर एक बेटे ने जन्म लिया जिसका नाम हजरत इस्माइल रखा गया आपको एक दिन ख्वाब आया कि अपनी  सबसे चहेती चीज अल्लाह की राह में कुर्बान करें  आपने 100 ऊंट कुर्बान कर दिए कुर्बान कर दिए ख्वाबों का यह सिलसिला थमा नहीं अपनी सबसे चाहती चीज कुर्बान करें आपने अपनी बीवी से बेटे इस्माइल को तैयार करने को कहा व ख्वाब के बारे में बताया जब आप तैयार कर बेटे पैगंबर हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम को सफा मरवा पहाड़ी को ले जा रहे थे तो रास्ते में शैतान ने बेटे को बरगलाना शुरू किया तेरे वालिद तुझे कुर्बान करने के लिए ले जा रहे हैं आपने कहा कोई बाप अपने बेटे को यूं ही कुर्बान करने के लिए ले जाता है मैं बहुत खुशनसीब हूं जो अल्लाह ने मेरी कुर्बानी चाही आपने अपने वालिद पैगंबर हजरत इब्राहिम खलीलुल्लाह से कहा आप  छूरी चलाते समय चराते समय मेरी आंखों पर पट्टी बांध दे ताकि आपको रहम नाै आपने ऐसा ही किया और उनकी गर्दन पर छुरी चलाई तो उसी वक्त अर्श ए  मूअल्ला हिल गया व एक दुंबा आप की जगह खड़ा हो गया इसी याद में ईद उल  अजहा पूरी दुनिया में मनाई जाती है

—-सज्जाद अहमद कुरेशी

इस्लामी मामलों के जानकार

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