Thu 19 05 2022
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डीपीएम और लेखापाल की मिलीभगत से हुई धांधली, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने दिया नोटिस

डीपीएम और लेखापाल की मिलीभगत से हुई धांधली, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने दिया नोटिस

शाजापुर। सेवा समाप्ति के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के साथ सांठगांठ कर अवैध रूप से वेतनवृद्धि का लाभ लेकर सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाने वाला डीआईईसी सलाहकार अब भी विभाग में सेवा देते हुए वरिष्ठों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा दिए गए नोटिस के बाद भी अब तक मामले में कोई कार्रवार्ई नही की गई है। या यूं कहा जाए कि जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के साथ स्वयं के द्वारा किए गए घोटाले को भी छिपाने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य मिशन के नोटिस को भी गंभीरता से नही लिया जा रहा है। दरअसल  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग शाजापुर में डीआईईसी सलाहकार लालसिंह परमार को सेवा समाप्ति 13 दिसंबर 2011 से पुन: नियुक्ति दिनांक 21 जनवरी 2016 की अवधि में नो वर्क, नो पे मानते हुए मानदेय भुगतान नहीं किया गया था, लेकिन इसके बाद भी लालसिंह ने विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर उक्त अवधि में अवैधानिक ढंग से वेतनवृद्धि की पात्रता न होने पर भी वर्ष 2011 से 2016 तक अनाधिकृत रूप से करीब 5 लाख 10 हजार 435 रुपए का लाभ लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। मामले की जांच हुई मामला भोपाल वरिष्ठ कार्र्यालय भी जा पहुंचा, लेकिन शाजापुर में बैठे जिम्मेदारों की मिलीभगत के कारण कर्मचारी पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नही की गई है। इधर विभागीय अधिकारी एक-दूसरे की गलती बताते हुए मामले में टाल मटोल करने में लगे हुए हैं।
स्वास्थ्य मिशन ने जारी किया नोटिस, जिम्मेदारों ने किया अनदेखा
अवैधानिक ढंग से वेतन वृद्धि का लाभ लेने के मामले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश द्वारा 2 सितंबर 2021 को लालसिंह परमार को एक नोटिस भेजा गया। मिशन द्वारा दिए गए नोटिस में बताया गया है कि सेवा समाप्ति दिनांक 13/12/2011 से पुन: नियुक्ति दिनांक 21/01/2016 की अवधि को नो वर्क, नो पे मानते हुए मानदेय भुगतान नहीं किया गया, किन्तु लालसिंह परमार आपके द्वारा उक्त अवधि में वेतनवृद्धि की पात्रता न होने पर भी वर्ष 2011 से 2016 तक अनाधिकृत रूप से वेतनवृद्धि प्राप्त की जाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को आर्थिक क्षति पहुंचाई है। एचआर एमआईएस शाखा, राज्य कार्यालय भोपाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक 510435, पात्रता से अधिक अनाधिकृत भुगतान प्राप्त किया गया है। पुन: नियुक्ति के दौरान परमार द्वारा कर्तव्य स्थल पर पूर्ण निष्ठावान एवं ईमानदारी से कार्य करने हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला शाजापुर के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था, किन्तु इसके बाद भी अनाधिकृत वेतनवृद्धि एवं पात्रता से अधिक भुगतान प्राप्त करने की सूचना वरिष्ठ अधिकारी को दी जानी थी जो नही दी गई। नोटिस का 07 दिवस के अदंर प्रतिवाद उत्तर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला शाजापुर के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यहां अधिकारियों को इस मामले में कोई लेना देना ही नजर नही आ रहा है और वे एक दूसरे की गलती बता रहे हैं।
डीपीएम और लेखापाल की गलती
वेतन निर्धारण और भुगतान संबंधित मामले की जिम्मेदारी डीपीएम और लेखापाल की है। उन्हे समझना चाहिए था कि किसे कितने का भुगतान किया जाना है। परमार को वेतन वृद्धि का अवैध लाभ देने के मामले में डीपीएम और लेखापाल की ही गलती है।
-डॉ राजू निदारिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शाजापुर।
सलाहकार ने भोपाल जवाब भेजा होगा
वेतन वृद्धि का गलत ढंग से लाभ देने के मामले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने परमार को नोटिस दिया था। उन्होने मामले में नोटिस का जवाब बनाकर भोपाल भेजा होगा।
-बलराज, डीपीएम शाजापुर।
मेरी गलती नही है
वेतन वृद्धि का लाभ देने को मैने अधिकारियों से नही कहा था। जिला कार्यक्रम अधिकारी और लेखापाल ने ही वेतन वृद्धि का प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा, इसमें मेरी गलती नही है। वहीं स्वास्थ्य मिशन से मुझे जो नोटिस मिला था मैने उसके जवाब बनाकर भेज दिया है।
-लालसिंह परमार, डीआईईसी सलाहकार शाजापुर।

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