Wed 27 05 2020
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धर्म-जाति के आधार पर देश का बंटवारा मंजूर नही

धर्म-जाति के आधार पर देश का बंटवारा मंजूर नही

सीएए और एनआरसी के विरोध में संविधान बचाओ मंच ने दिया धरना
शाजापुर। केंद्र सरकार द्वारा जातिगत आधार पर सीएए कानून लागू किए जाने और एनआरसी बिल पारित किए जाने के फैसले के खिलाफ देशभर में विरोध के स्वर गूंज रहे हैं और इसी कड़ी में सोमवार को संविधान बचाओ मंच के बैनरतले शहर के लोगों ने कानून का विरोध कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। बस स्टैंड गड्ढा पर सीएए के विरोध में आयोजित धरना आंदोलन में अजाक्स परिसंघ के रामप्रसाद परमार, प्रांतीय बलाई समाज अध्यक्ष राधेश्याम मालवीय, राजेंद्रसिंह चौखुटिया, भीम आर्मी के राका बामनिया, मनोहरसिंह कटारिया, मुफ्ती इकरार साहब, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इरशाद खान, सीताराम पवैया, अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष वाजिद अली शाह, जिया लाला सहित शहर के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परमार ने कहा कि संविधान में छेड़छाड़ कर केंद्र सरकार द्वारा देश की अखंडता को सांप्रदायिकता के आधार पर खंडित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे कभी पूरा नही होने दिया जाएगा। उन्होने कहा कि मोदी सरकार देश में अनुसूचित जाति, जनजाति और मुस्लिम समाज के लोगों को दबाने का काम कर रही है। सरकार देश में सांप्रदायिकता की नफरत का जहर घोलकर सत्ता की रोटी सेंकना चाहती है। परमार ने कहा कि सरकार के खिलाफ दलित और अल्पसंख्यकों को एकजुट होना होगा, जिस दिन समाज के लोग संगठित हो गए उसी दिन देश का शीर्ष नेतृत्वकर्ता भी समाज का ही युवा होगा। वहीं बलाई समाज अध्यक्ष मालवीय ने कहा कि देश में सभी को सम्मान से जीने का अधिकार है, लेकिन सरकार संविधान के खिलाफ अपनी घृणित मानसिकता का परिचय देते हुए सीएए और एनआरसी जैसे काले कानून लाकर देश को धर्म जाति के नाम पर बांटना चाहती है। मालवीय ने कहा कि इसी देश में पैदा हुए हैं और यहीं जीएंगे और यहीं मरेंगे। चौखुटिया ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि दलित और मुस्लिमों को कन्धा से कन्धा मिलाकर चलना है। भीम आर्मी के राका बामनिया ने कहा कि देश की अखंडता को किसी भी कीमत पर खंडित नही होने दे दिया जाएगा। दलित समाज अल्प संख्यकों के साथ हमेशा खड़ा रहेगा। ब्लॉक अध्यक्ष खान ने कहा कि सरकार ने आसाम में एनआरसी का काला कानून लाकर देश के लोगों की कमाई से 12 सौ करोड़ रुपए खर्च कर दिए। उन्होने कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार सीएए, एनपीआर और एनआरसी जैसे काले कानून ला रही है। खान ने कहा कि देश में शरणार्थी हिंदू भाईयों को नागरिकता देने का विरोध नही किया जा रहा है, बल्कि देश को धर्म के आधार पर खंडित करने वालों का विरोध किया जा रहा है। भारत में हमेशा से ही हिंदू और मुस्लिम एकता कायम रही है, लेकिन केंद्र में बैठे लोग जनता को भ्रमित कर सांप्रदायिकता की आग देश में लगाने की कोशिश कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें मांग की गई कि एनआरसी, सीएए और एनपीआर जैसे कानून को देश में लागू नही किया जाए। इस अवसर पर वीलेश व्यास, दिनेश जिंदल, धर्मेंद्र सिकरवार, भीम आर्मी कांतीलाल जी, इरशाद बूटा, मौलाना जावेद खान, हाफिज शमीउल्लाह साहब, निसार लाला, अब्दुल जलील पटेल, मोहम्मद आफताब, सकीब खान, राजा पेंटर, मंजूर पेंटर सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।

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