Fri 26 11 2021
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दृढ़ इच्छा शक्ति से ही नशीली दवाओं से मिल सकता है छुटकारा-न्यायाधीश देवड़ा

दृढ़ इच्छा शक्ति से ही नशीली दवाओं से मिल सकता है छुटकारा-न्यायाधीश देवड़ा

शाजापुर। नशीली दवाओं के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुरेन्द्रकुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को न्यायाधीश राजेन्द्र देवड़ा की अध्यक्षता में ग्राम मुल्लाखेड़ी में विधिक जागरूकता शिविर लगाया गया। इस मौके पर प्राधिकरण सचिव एवं न्यायाधीश देवड़ा ने कहा कि नशा पूरे समाज के लिए बुराई है। नशा नहीं करने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा, इस दिवस का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नशीली दवाओं से मुक्ति पाना है। उन्होने कहा कि ड्रग्स का सेवन और लत एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक समस्या है। यह पूरे विश्व को प्रभावित करती है। इस दौरान उन्होने लोगों को जागरूक करते हुए नशीली दवाओं के दुरूपयोग का उन्मूलन, नशीली दवाओं के नियमित सेवन से पीडि़त लोगों को विधिक सहायता पंहुचाने के लिए नालसा के स्कीम के बारे में जानकारी दी। साथ ही कहा कि मानसिक विकलांगों को आज के दौर में सहानुभूति के साथ-साथ सहायता की भी जरूरत है। ऐसे व्यक्ति को समय पर इलाज कराने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करना चाहिए। कानून की नजर में मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को सभी अधिकार प्राप्त हैं। मानसिक रूप से विकलांगों को पुनर्वास के लिए 1987 में कानून बना और 2004 में इसका अनुपालन हुआ। अगर कोई मानसिक रोगी आसपास दिखे तो उसकी सूचना नजदीकी थाने को दें। संबंधित थाना नियमानुसार उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती करा कर परिजनों को सौंपेगा।
वहीं न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं ग्राम न्यायालय अधिकारी नीरज अग्रवाल ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि सामाजिक अभिशाप भी है। छोटी उम्र में शादी की कुरीति को रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू किया गया है, जिसमें लडक़े की आयु यदि 21 वर्ष से कम है और लडक़ा या लडक़ी दोनों में से कोई विवाह योग्य उम्र का नहीं है, तो ऐसा विवाह बाल विवाह होने से अपराध माना गया है। उन्होने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक रहकर बाल विवाह नहीं कराना चाहिए। आमजन में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से ही संपूर्ण जिले में आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत बाल विवाह, नशीली दवाओं का दुरूपयोग और इसका उन्मूलन, निषेध अभियान के तहत कार्यक्रम किए जा रहे हैं। ग्राम मुल्लाखेड़ी में शिविर के समापन पश्चात् जिला जेल शाजापुर में भी जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। साथ ही जेल का निरीक्षण किया गया। इस मौके पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष परसाई द्वारा बंदियों को विधिक सहायता की प्रक्रिया एवं जेल में निरूद्ध बंदियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं तथा उनके अधिकार के संबंध में जानकारी दी गई। मुल्लाखेड़ी में आयोजित कार्यक्रम में सरपंच हफीज खां, सचिव कैलाशचन्द्र, पैरालीगल वालेंटियर आदि मौजूद थे। संचालन पैनल अधिवक्ता सईद पाठन ने किया।

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