Fri 03 12 2021
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दहेज प्रथा समाज के लिए कंलक है, इस कुरीति को समाप्त करने के जागरूकता जरूरी है-न्यायाधीश

दहेज प्रथा समाज के लिए कंलक है, इस कुरीति को समाप्त करने के जागरूकता जरूरी है-न्यायाधीश

शाजापुर। अरमानों का मोल लगाना बंद करो, दहेज के लिए लडक़ा बेचना बंद करो। उक्त बातेें प्रधान जिला न्यायाधीश अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में भारत की आजादी का महोत्सव कार्यक्रम अंतर्गत ग्राम आक्या चौहानी में 30 अक्टूबर शनिवार को आयोजित विधिक साक्षरता सह जागरूकता शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजेन्द्र देवड़ा ने कही। उन्होने बालिकाओं के लिए आवाज उठाने और उनके अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए कहा।  न्यायाधीश ने जन सामान्य को बालविवाह निषेध अधिनियम, महिलाओं का यौन उत्पीडऩ निषेध और निवारण अधिनियम, पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान लिंग चयन का निषेध अधिनियम से संबंधित विषयों पर सरल एवं सहज भाषा में जानकारी दी। न्यायाधीश देवड़ा ने कहा कि दहेज प्रथा समाज के लिए कलंक है। आज की तारीख में लड़कियां पढ़ लिख रही हैं और हर क्षेत्र में आगे जा रही हैं, किंतु शादी ब्याह की बात आती है तो आज भी दहेज उनकी शादी में एक प्रमुख बाधा बनकर खड़ा रहता है। उन्होने कहा कि दहेज हत्याओं में पहले की अपेक्षा कमी अवश्य आई है, परंतु वह बंद नहीं हुई है। यही कारण है कि आज भी देश में हर दूसरे घंटे में एक विवाहिता दहेज की बलिवेदी पर चढ़ा दी जाती है। दहेज एक सामाजिक अपराध है,  जब भी इस कारण किसी लडक़ी को जान गंवानी पड़ती है तो तरस आता है उस नौजवान पर कि अपने आपको मर्द कहने वाला असल में कायर है। उसके कन्धों में इतना बल नहीं कि एक परिवार बना सके, जब दम नहीं तो स्वीकार करों, यूं औरत के जीवन का फैसला करने का कोई हक नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध, बल्कि सामाजिक अभिशाप भी है, क्योंकि बाल विवाह करना, करवाना दोनों कानूनी अपराध है। यह सामाजिक बुराई भी है। बाल विवाह बर्बादी का भी कारण है। बाल विवाह में शामिल रहे माता-पिता, पुजारी-पंडित, रिश्तेदार, मित्र, हलवाई आदि पर भी कानूनी रूप से कार्रवाई हो सकती है। उन्होने बताया कि बच्चों की छोटी उम्र में शादी की कुरीति को रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम लागू किया गया है, जिसमें लडक़े की आयु 21 वर्ष से कम है और लडक़ी की आयु 18 वर्ष से कम है तो वे विवाह योग्य नही है। यदि विवाह के समय लडक़ा या लडक़ी दोनों में से कोई विवाह योग्य उम्र का नहीं है, तो ऐसा विवाह बाल विवाह होने से अपराध माना गया है। न्यायाधीश देवड़ा ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को अच्छे-बुरे स्पर्श का अंतर जरूर समझाएं। वहीं कार्यक्रम के दौरान बताया कि 09 नवम्बर 2021 को स्थान नारायणगांव मंडी प्रगंण सतगांव में मेगा शिविर का आयोजन किया जाएगा। मेगा शिविर में जिला प्रशासन द्वारा जनसुनवाई लगाकर समस्याओं का निराकरण भी किया जाएगा, इसके साथ ही कोरोना महामारी से बचाव हेतु जिला चिकित्सालय की ओर से वैक्सीनेशन शिविर भी आयोजित किया जाएगा। उन्होने जन समान्य से अपील की गई कि उक्त तिथि में आयोजित शिविर में उपिस्थत हो कर अपनी समस्याओं का निराकरण कराएं। इस अवसर पर शिविर में गांव के सरपंच शिवनारायण, सचिव मानसिंह सहित गांव के अन्य व्यक्ति मौजूद थे।

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