Thu 02 04 2020
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रिछोदा की घटना के तीन माह पूर्व ही बीआरसी ने किया था आगाह

रिछोदा की घटना के तीन माह पूर्व ही बीआरसी ने किया था आगाह

तत्कालीन शिक्षा अधिकारी की कार्यशैली भी संदेह के कटघरे में
बीआरसी द्वारा जारी किया गया नोटिस।
शाजापुर। ग्राम रिछोदा में घटित हुई हृदय विदारक घटना के पीछे तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली संदेह के कटघेरे में नजर आ रही है, क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों ने जमीनी हकीकत जानने के बाद भी स्कूल संचालक को मान्यता जारी कर दी थी। वहीं बीआरसी द्वारा भी घटना के अंदेशे को लेकर स्कूल परिसर में मौजूद मौत के कुंए के बारे में शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों और स्कूल प्रबंधन को आगाह कर दिया था, लेकिन ना तो स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की जान की सुरक्षा को लेकर कोई कदम उठाया और ना ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता दिखाते हुए कुंए को ढंकने को लेकर कार्रवाई की। नतीजतन तीन मासूमों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम रिछोदा के ए एकेडमी स्कूल को 2015 में पहली मान्यता दी गई थी और तभी से लेकर स्कूल परिसर में बिना मुंडेर का मौत का कुआं भी मौजूद था, परंतु तत्कालीन बीआरसी योगेश भावसार और जिला शिक्षा अधिकारी थॉमस भूरिया ने बिना बच्चों की जान की सुरक्षा को ध्यान में रखें नियमों को ताख में रखकर ए एकेडमी को मान्यता जारी कर दी थी। इसके बाद 2018 में भी जिला शिक्षा अधिकारी कैलाश राजपूत ने बिना कुछ जांचे-परखे एकेडमी की मान्यता का नवीनीकरण कर दिया। इसके पश्चात भ्रमण के दौरान बीआरसी नौशाद अहमद कुरैशी ने ए एकेडमी का निरीक्षण किया जहां वे स्कूल के असुरक्षित माहौल को देखकर हतप्रभ रह गए। इसके बाद कुरैशी ने स्कूल संचालक को एक नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया कि स्कूल परिसर में मौत का कुआं मौजूद है जिसे तत्काल बंद किया जाए, ताकि भविष्य  में किसी तरह की कोई अप्रिय घटना घटित नही हो सके, लेकिन बावजूद इसके स्कूल संचालक के कान पर जूं नहीं रेंगी, जिस पर बीआरसी कुरैशी द्वारा इस पूरे मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया, परंतु जिम्मेदार अधिकारी ने ध्यान देने की बजाय स्कूल संचालक से दोस्ताना निभाना ज्यादा जरूरी समझा और जिम्मेदारों की यही उदासीनता, मनमानी और लापरवाही के चलते आखिर 3 नौनिहालों को मौत के मुंह में समाना पड़ा।
जिले में 745 निजी स्कूल हो रहे संचालित
उल्लेखनीय है कि शाजापुर जिले में करीब 745 निजी स्कूलों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें से अधिकांश स्कूल नियम विरुद्ध ढंग से चल रहे हैं। तत्कालीन बीआरसी और शिक्षा अधिकारी की लापरवाही और मनमानी के चलते इन स्कूलों को मान्यता जारी की गई है। इन स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। वर्तमान के शिक्षा अधिकारी इतने सारे स्कूल की मान्यता को लेकर हैरतज़दा हैं और उनका कहना है कि छोटे से जिले में इतनी संख्या में निजी स्कूल संस्थानों को किस आधार पर मान्यता जारी कर दी गई है इसकी जांच कराई जा रही है।
दोषियों को इनाम और आगाह करने वालों पर कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि ग्राम रिछोदा में ए एकेडमी स्कूल को संचालित किए जाने की वर्ष 2015 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी थॉमस भूरिया द्वारा मान्यता दी गई थी। वहीं इस मान्यता में तत्कालीन बीआरसी योगेश भावसार की कार्यशैली भी कटघरे में है, क्योंकि जिस वक्त तत्कालीन बीआरसी की रिपोर्ट पर शिक्षा अधिकारी ने मान्यता प्रदान की थी, उसी समय से स्कूल परिसर में बिना मुंडेर का मौत का कुआ भी मौजूद था। बावजूद इसके तत्कालीन अधिकारियों ने स्कूल संचालक अजीतसिंह पिता रामसिंह को बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने के लिए स्कूल की मान्यता के नाम पर लायसेंस जारी कर दिया था। स्कूल की मान्यता मिलने के बाद बच्चों से प्रतिमाह मोटी रकम लेने के बाद भी रामसिंह ने स्कूल में सुरक्षा के इंतजाम नही किए और वह लगातार बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करता रहा। इसके बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी कैलाश राजपूत ने फरवरी 2018 में ए एकेडमी स्कूल की मान्यता का दोबारा से नवीनीकरण कर दिया। आखिरकार जिम्मेदार शिक्षा अधिकारी की लापरवाही के कारण ए एकेडमी में मौजूद बिना मुंडेर का कुआ तीन मासूमों की जिंदगी लील गया। मासूमों की मौत के बाद प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करना शुरू किया और प्रभारी बीआरसी नौशाद एहमद कुरैशी को निलंबित कर दिया। जबकि प्रभारी बीआरसी नौशाद कुरैशी ने रिछोदा में हुई घटना के तीन माह पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों को हादसे की संभावना जताते हुए आगाह कर दिया था। कुरैशी ने माह जुलाई में ए एकेडमी का निरीक्षण किया और 4 जुलाई 2019 को एकेडमी संचालक को नोटिस जारी करते हुए चेतावनी दी कि वह अपने स्कूल परिसर में बने बिना मुंडेर के कुंए के आसपास बाउंड्रीवाल कराए। साथ ही प्रभारी बीआरसी कुरैशी ने स्कूल में मौजूद मौत के कुंए की वरिष्ठ अधिकारी से भी शिकायत की थी, लेकिन  स्कूल संचालक से साथ सांठगांठ के चलते जिम्मेदार अधिकारी ने मामले को गंभीरता से नही लिया और अंत में तीन मासूमों की जिंदगी खत्म हो गई। वहीं अब प्रशासन ने तत्कालीन शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय हादसे को लेकर तीन माह पूर्व ही आगाह करने वाले बीआरसी पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपानी शुरू कर दी है।
तत्कालीन अधिकारियों पर भी होनी चाहिए कार्रवाई
रिछोदा गांव में कुंए में डूबने से 3 बच्चों की मौत के मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और तत्कालीन बीआरसी पर भी कार्रवाई किया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, क्योंकि तत्कालीन अधिकारियों ने बिना मौका मुआयना किए असुरक्षित भवन और परिसर में संचालित स्कूल को मान्यता जारी कर दी थी, जिसका खामियाजा मासूमों को अपनी जान चुका कर भुगतना पड़ा। जबकि प्रशासन ने अप्रिय घटना के घटित होने से 3 माह पूर्व ही आगाह करने वाले बीआरसी नौशाद कुरैशी पर कार्रवाई कर दी है। जबकि इस पूरे मामले में उन अधिकारियों पर कार्रवाई की जाना चाहिए जिन्होंने सबसे पहले स्कूल को मान्यता दी थी।
इनका कहना है
रिछोदा की घटना में जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी बीआरसी कुरैशी को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में वे अपना पक्ष रख सकते हैं। यदि तत्कालीन शिक्षा अधिकारी भी दोषी निकलते हैं तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
-डॉ वीरेंद्रसिंह रावत, शाजापुर कलेक्टर।

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