Sat 27 11 2021
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बेटियों को शिक्षित करें ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बने- जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव

बेटियों को शिक्षित करें ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बने- जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव

महिलाओं के सम्मान के लिए समाज को चिंतन की आवश्यकता है- कलेक्टर श्री जैन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले में विभिन्न कार्यक्रम संपन्न

शाजापुर,  बेटियों को शिक्षित करें ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सके। यह बात अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज नगरपालिका परिषद शाजापुर के सामुदायिक मांगलिक भवन में संपन्न हुए महिला सम्मेलन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। इस अवसर पर कलेक्टर श्री दिनेश जैन, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सहायता प्राधिकरण श्री सुरेन्द्र सिंह गुर्जर, अपर कलेक्टर श्रीमती मंजूषा विक्रांत राय, अभिभाषक संघ अध्यक्ष श्री अनिल आचार्य, अभिभाषक श्री यूनुस खान, जिला महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सुषमा भदौरिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं भी उपस्थित थी।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए केवल कानून बनने से समस्याओं का हल नहीं होगा, बल्कि अधिकारो के प्रति जागरूकता एवं कानून की जानकारी के लिए महिलाओं का शिक्षित होना भी जरूरी है। इसके लिए शिक्षा की शुरूआत अपने घर से करते हुए सभी पालक अपनी बेटियो को शिक्षित करें। बेटियों को अपने अधिकारों की जानकारी होगी, तब ही वह अपने अधिकारों के प्रति लड़ सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना अत्यधिक आवश्यक है। किन्ही कारणों से यदि महिलाएं स्कूल नहीं जा सकी है तो वे प्रोढ़ शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर सकती है। दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए जरूरी है कि न तो हम दहेज लें और न ही दहेज दें। महिला दिवस के संबंध में उन्होंने कहा कि एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन महिला दिवस मनाए। महिला ईश्वर से ज्यादा पूज्यनीय है। महिलाओं के कारण ही संसार की रचना हुई है। महिलाएं अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए चिंतित रहती है। महिलाओं के त्याग का सम्मान करें।

कलेक्टर श्री जैन ने संबोधित करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति बता रही है कि शाजापुर की महिलाएं जागरूक हैं। महिलाओं को जब भी अवसर मिलता है, वह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती है। विभिन्न प्रतियोगिताओं को महिलाओं ने अव्वल स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिये। साथ ही लड़को को भी संस्कारित करने की आवश्यकता है। लड़कियों के लिए परिवार द्वारा विभिन्न बंधन रखे जाते हैं, परन्तु लड़को को हर तरह की छूट होती है। इस कारण समाज को महिलाओं के सम्मान के लिए लड़को को भी संस्कारित करने की आवश्यकता है। लड़के अपने आसपास घर परिवार की महिलाओं का सम्मान करना सीखें। हमारे देश के संविधान ने महिलाओं को बहुत सारे अधिकार दिये हैं। संविधान लागू होते से ही हमारे देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया गया है, जबकि बिट्रेन एवं अमेरिका जैसे विकसित देशों ने महिलाओं को काफी दिनों बाद वोट देने का अधिकार दिया था। उन्होंने बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी बालिका को ड्रापआउट नहीं रहने दें। यदि बालिकाएं स्कूल छोड़ देती हैं तो उन्हें पुन: प्रवेश दिलाएं। समाज में बालिकाओं के प्रति समान भाव पैदा करना होगा। महिलाओं को अपने स्वास्थ, सुरक्षा एंव अधिकार की चिंता करना चाहिये। सामाजिक जिम्मेदारी के निर्वहन में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

अतिरिक्त न्यायाधीश एवं जिला विधिक सहायता प्राधिकरण सचिव श्री गुर्जर ने संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं शिक्षित होगी, तब ही समाज विकसित होगा। विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा है, इसलिये महिलाओं का शिक्षित करना जरूरी है। बालक एवं बालिकाओं ने समाज में विभेद न करें, बल्कि बालक एवं बालिकाओं को समान शिक्षा दें। माता बच्चों की प्रथम शिक्षक होती है। माताएं अपने बच्चों को विशेषकर बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। हमारे समाज में कई ऐसे रीति रिवाज हैं जो महिलाओं के विकास में बाधक है। ऐसे रीति रिवाजों को हटाना जरूरी है। इस अवसर पर उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा एवं उनके हक में बने कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोई भी पीड़ित महिला न्याय पाने के लिए विधिक सहायता प्राधिकरण या न्यायाधीश के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने बताया कि विधिक सहायता प्राधिकरण द्वारा पैरालीगल वॉलेंटियर्स भी बनाए गए हैं, इनसे भी समय-समय पर मदद प्राप्त की जा सकती है। इसके पूर्व जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती भदौरिया ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर पूर्व प्राचार्य श्रीमती संतोष शर्मा ने भी संबोधित करते हुए कहा कि आज की महिला नित नए आयामों को छू रही है।

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