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बेटी पराया धन नहीं, बल्कि दो कुलों को जोडऩे वाला सेतु है : पं. नागर

बेटी पराया धन नहीं, बल्कि दो कुलों को जोडऩे वाला सेतु है : पं. नागर

गवली मोहल्ले में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाह, आज पूर्णाहुति के बाद होगा समापन
शाजापुर, 26 फरवरी. बेटी पराया धन नहीं, बल्कि दो कुलों को जोडऩे वाला सेतु है. जिन घरों में बेटियां जन्म लेती हैं, उन घरों में लक्ष्मी का वास होता है. अपनी साधारण सी वस्तु किसी अनजान को कोई नहीं देता, लेकिन ईश्वर एक पिता को इतना बड़ा हृदय देता है कि वह अपने कलेजे के टुकड़े का हंसते-हंसते कन्यादान कर देता है.
यह बात गवली मोहल्ले में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत गीता के छठे दिन व्यास गादी पर विराजित पं. दिनेशचंद्र नागर ने श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाह प्रसंग के दौरान कही. कथावाचक पं. नागर ने कहा कि लोभ और ईष्र्या मनुष्य के सबसे बड़े दुश्मन हैं. मनुष्य इनके वशीभूत होकर भक्ति, आराधना और ईश्वर से दूरी बनाने लगता है. क्योंकि लालच के वशीभूत मनुष्य को धन और वैभव के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन जब काया साथ छोडऩे लगती है और धन, वैभव, बल का ह्नास होने लगता है, तब मनुष्य को भगवान और भक्ति की याद आती है, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है. वास्तविकता तो यह है कि आप स्वस्थ मन और सच्ची भक्ति में लीन रहेंगे, तो आपको ईश्वर से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह सब आपके पास खुद-ब-खुद आता रहेगा. कथा के छठे दिन कथा स्थल पर श्रीकृष्ण और माता रूकमणी के विवाह का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर अनूठे विवाह का आनंद लिया.
आज सुदामा चरित्र की कथा के बाद होगा समापन
ग्वाल महासभा के जिलाध्यक्ष रूपेश गवली ने बताया कि कथा के सातवें और अंतिम दिन भगवान श्री कृष्ण और सुदामा चरित्र का वर्णन किया जाएगा. जिसके बाद पूर्णाहुति के साथ कथा का समापन किया जाएगा. इसके बाद कथा स्थल पर ही श्रद्धालुओं को महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा. समाज के गणेश गवली, महेश गवली ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है.

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