Fri 20 05 2022
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बालिका दिवस पर ग्राम अभयपुर में जन जागरूकता शिविर आयोजित

बालिका दिवस पर ग्राम अभयपुर में जन जागरूकता शिविर आयोजित

शाजापुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष एवं जिला सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्रकुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आजादी के अमृत महोत्सव के आठवें चरण की श्रंखला में सोमवार को ग्राम पंचायत अभयपुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत प्राधिकरण सचिव राजेन्द्र देवड़ा, वन स्टॉप सेंटर महिला एवं बाल विकास विभाग नेहा जायसवाल, परियोजना अधिकारी नेहा चौहान द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कन्याओं को तिलक लगाकर की गई। इस मौके पर प्रशासक वन स्टॉप सेंटर नेहा जायसवाल ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए, क्योंकि किसी भी परिस्थति में महिला पुरूष से कम नहीं है। उन्होने महिलाओं के हितार्थ  में बनाए गए कानूनी प्रावधानों एवं बच्चों की शिक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों को विस्तार से समझाया। साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना के कार्ड तथा सुकन्या समृद्धि योजना की पासबुक का वितरण किया गया।
्र इसके पश्चात् न्यायाधीश सुश्री उर्वशी यादव ने कहा कि बाल विवाह अधिनियिम 2006 अंतर्गत बाल विवाह कानूनी अपराध है। बाल विवाह के दुष्प्रभाव एवं बाल विवाह जैसी बीमारी समाज को कमजोर एवं बालिकाओं के भविष्य को अंधकारमय बनाती है। इसके साथ ही बालिकाओं को शिक्षित करने हेतु जोर देते हुए कहा कि यदि बालिका शिक्षित होंगी  तो अपने अधिकारों के प्रति सजग रहेंगी। शिक्षा हर समस्या के ताले की चाबी है। सचिव देवड़ा ने बेटी कुदरत का है उपहार, इसको जीने का दो अधिकार, कहते हुए कहा कि वर्ष 2012 से अंर्तराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरूआत की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को सशक्त कर उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडऩ अधिनियम 2013 के विभिन्न पहलुओं को विस्तृत रूप से सरल शब्दों में बताया। कार्यक्रम में दहेज निषेध अधिनियम 1961 के बारे में बताते हुए कहा कि न सिर्फ दहेज लेने या देने वाला अपराधी है, बल्कि दहेज के लेनदेन में सहयोग करने वाला भी अपराधी है। ऐसे अपराध करने वाले व्यक्ति को 05 वर्ष की कैद एवं 15, 000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होने बताया कि भू्रण परीक्षण एवं भ्रूण हत्या के मामलों में वृद्धि होने से वर्ष 1994 में बने पूर्व गर्भाधान और प्रसव निदान तकनीक अधिनियम 1994 बनाया गया। उक्त अधिनियम के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच कराना कानूनी अपराध है और ऐसा कराने वाले व्यक्तियों, डॉक्टर्स, लेबकर्मी को 03 से 05 साल तक की सजा तथा 10 से 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस अवसर पर ग्रामीण मौजूद थे।

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