Sat 14 05 2022
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आंगनवाड़ी केन्द्रों के समग्र विकास के लिए सामाजिक सहभागिता की जरूरत है-कलेक्टर

आंगनवाड़ी केन्द्रों के समग्र विकास के लिए सामाजिक सहभागिता की जरूरत है-कलेक्टर

शाजापुर। आंगनवाडिय़ों की सेवाओं को अधिक प्रभावी और बालरूचि योग्य बनाने के लिए शासन के प्रयास निरंतर जारी हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों में उपलब्ध सुविधाओं के अतिरिक्त अन्य सुविधाओं की पूर्ति में सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता की जरूरत है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों को ऐसा परिवेश उपलब्ध कराया जाए, जिससे कि उनका समग्र विकास संभव हो। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कलेक्टर दिनेश जैन ने शुक्रवार को विभिन्न संगठनों एवं समाज प्रमुखों के साथ बैठक लेकर उनसे अपनी पसंद या आसपास की आंगनवाड़ी केन्द्र गोद लेने का अनुरोध किया। कलेक्टर जैन ने कहा कि जिले में कुल 1054 आंगनवाड़ी केन्द्र हैं। इन आंगनवाड़ी केन्द्रों के समग्र विकास के लिए विभिन्न संगठन गोद लेकर आंगनवाड़ी केन्द्रों के अधोसंरचनामूलक आवश्यकताओं की पूर्ति के कार्य जैसे कि आंगनवाड़ी केन्द्र भवन का निर्माण,  बाउण्ड्रीवॉल, अतिरिक्त कक्ष का निर्माण, रंगाई-पुताई, बच्चों के लिए आउटडोर एवं इन्डोर खेल सामग्री झूला, फिसलपट्टी,  डबलवार आदि, स्थायी प्रकृति के फर्नीचर, टेबल-कुर्सी, सीख आधारित खिलौने एवं जोखिमरहित खिलौने, पुस्तकें,  पंखे-लाईट, कूलर, दरी आदि अन्य आधारभूत सेवाओं में सहयोग कर सकते हैं। बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं यूनिफार्म,  गर्म कपड़े, स्वेटर, केप, जूते-चप्पल, बैग एवं अन्य सामग्री की पूर्ति कर सकते हैं। स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं में कुपोषित बच्चों को सुपोषित करना, पोषण सेवाओं में सहयोग देना सहित अन्य अपनी रूचि के अनुसार सेवाएं दे सकते हैं। कलेक्टर ने कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए कि वे आंगनवाड़ी गोद लेने वालों के नाम आंगनवाड़ी केन्द्र में प्रदर्शित करें और सहयोग देने वालों का रिकार्ड रखें। साथ ही आंगनवाड़ी की पूर्व की स्थिति एवं बाद की स्थिति का डाक्युमेंटेशन करें। बैठक में कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि आंगनवाड़ी के एडॉप्शन के लिए सहमति पत्र भरना होगा। साथ ही मोबाईल नंबर 8989622333 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन करा सकते हैं। जिले में अब तक 692 आंगनवाड़ी केन्द्रों को गोद लेने के लिए लोगों द्वारा सहमति प्रदान की गई है। साथ ही उन्होने बताया कि आंगनवाड़ी केन्द्रों के साथ-साथ किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण, अधिनियम में संकटग्रस्त बच्चों के संरक्षण के लिए स्पांन्सरशिप कार्यक्रम बनाया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों के जीवन स्तर में सुधार लाना और चिकित्सा, पोषण, शिक्षा एवं विकास संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुपूरक सहायता या वित्तीय सहायता प्राप्त करना है। निजी स्पांसरशिप के तहत ऐसे बच्चे जिनके माता या पिता या दोनों की कोरोना से मृत्यु हो गई है अथवा किसी संकटग्रस्त परिस्थिति में निवासरत् हैं उन्हे सहायता पहुंचाना है। इस दौरान कलेक्टर ने सभी संगठनों के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे अंकुर अभियान के तहत अधिक से अधिक पौधें लगाकर वायुदूत एप्प पर अपलोड करें और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र को प्राप्त करें। इसी तरह उन्होने उर्जा साक्षरता अभियान के संबंध में सभी से कहा कि जितनी जरूरत हो उतनी ही बिजली का उपयोग करें। जरूरत से ज्यादा बिजली की खपत नहीं करें। अपने बिजली के बिल में 10 प्रतिशत तक कटौत्री लाने का प्रयास करें। साथ ही उर्जा साक्षरता के लिए ऊषा पोर्टल पर पंजीयन कर पोर्टल पर दिए गए मॉड्यूल कोर्स को पूरा कर ऊर्जा साक्षरता सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं।

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