शासकीय भूमि पर पट्टा देने के एवज में सरपंच ने मांगे 20 हजार

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ग्रामीणों ने रुपया देने से इनकार किया तो उनकी झोपडिय़ां तोडऩे का निकाल दिया आदेश

शाजापुर। शासकीय भूमि पर वर्षों से झोपडिय़ां बनाकर रहने वाले परिवारों ने जब जिम्मेदारों को रिश्वत देने से इनकार कर दिया तो उन्होने अचानक से कार्रवाई का डर दिखाकर परिवार को गांव से निकालने का फरमान सुना दिया। इस तुगलकी फरमान से परेशान लोग
राहत पाने के लिए मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और आवेदन सौंपा। जिला पंचायत सीईओ श्रीमती वंदना शर्मा को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि वे विमुक्त घुमक्कड़ एवं अद्र्ध घुमक्कड़ समाज के लोग हैं और ग्राम ईमलखेड़ी स्थित सरकारी भूमि पर विगत दो वर्र्षों से झोपडिय़ां बनाकर रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच जगदीश परमार पट्टा स्वीकृत करने के एवज में रुपयों की मांग कर रहा है, जब उन्होने रुपया देने से मना किया तो ऐसे में तहसीलदार और गांव के सरपंच ने अचानक से झोपडिय़ां हटाने का आदेश जारी कर कर दिया है जिसकी वजह से उनका पूरा परिवार चिंता में डूबा हुआ है। पीडि़त परिवार ने आवेदन में बताया कि उनके बच्चों को स्कूल में दाखिला करा दिया गया है, अब ऐसे में यदि उनकी झोपडिय़ां तोडक़र उन्हे गांव से बाहर निकाल दिया गया तो उनके बच्चों की पढ़ाई का भी नुकसान होगा। आवेदन में मांग की गई कि झोपडिय़ों को हटाए जाने की बजाय यहां रहने वाले परिवार को पट्टे आवंटित किए जाएं।
पट्टा चाहिए तो रुपया लाओ
घर से बेघर होने का फरमान मिलने के बाद से ग्राम ईमलीखेड़ा के कुछ परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है और वे राहत पाने के लिए जिला प्रशासन का दरवाजा खटाखटा रहे हैं। शाजापुर पहुंचे घुमक्कड़ समाज के लोगों ने बताया कि वे गांव में दो वर्षों से निवास कर रहे हैं, लेकिन न तो उनका राशन कार्ड बनाया गया है और न ही आधार कार्ड बनाया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि वे जिसे भूमि पर दो साल से रह रहे हैं उसे पट्टे के रूप में स्वीकृत करने के लिए सरपंच 20 हजार रुपए की मांग कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच का साफ तौर पर कहना है कि पट्टा चाहिए तो रुपया लाओ और यदि रुपया नही है तो झोपडिय़ां तोड़ो नही तो जेल करवा देंगे। मामले में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राहत दिए जाने की मांग की है। कलेक्टर कार्यालय में शिकायत करते समय ओमप्रकाश नाथ पिता मोतीनाथ, मदननाथ, गब्बरनाथ, उमरावसिंह, लखननाथ, जितेंद्रनाथ, श्रीमती दाखाबाई, कौशल्याबाई, आरती, भगवतीबाई, हिनाबाई, कालीबाई, सीमाबाई आदि उपस्थित थे।
इनका कहना है
जिन लोगों ने शिकायत की है वे मेरे गांव के स्थाई निवासी नही हैं। उक्त लोगों ने गांव की सरकारी भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया है और अब कार्रवाई करने से बचने के लिए आरोप लगा रहे हैं। मुझ पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
-जगदीश परमार, सरपंच ईमलीखेड़ा।

 

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