कक्षा 5वीं एवं 8वीं परीक्षा बोर्ड करने का विधेयक राज्यसभा में पारित

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 अध्यापक संघ द्वारा सरकार से की जा रही मांग अब पूरी होने की कगार पर जा पहुंची है और संघ के लगातार संघर्ष के बाद लोकसभा में विधेयक के पास होने के बाद अब राज्यसभा ने भी विधेयक को पारित कर दिया है। बेहतर शिक्षा के कानून के पारित होने पर संघ के पदाधिकारियों के हर्ष का माहौल है।

गौरतलब है कि चाणक्य शिक्षक अध्यापक संघ द्वारा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए लंबे समय से सरकार से मांग की जा रही थी कि कक्षा 5वीं एवं 8वीं की बोर्ड परीक्षा करने का विधेयक जो केंद्रीय मंत्री मंडल में पारित किया गया है उसे संसद से शीघ्र ही लागू कराया जाए, आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 04 एवं धारा 16 को समाप्त किया जाए ताकि शैक्षणिक स्तर से कमजोर बच्चों को दोबारा से सीखने का मौका मिल सके और शासकीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 1ली के पूर्व कक्षा प्री.प्रायमरी खोली जाए जिससे सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा कर सके, स्कूलों के पाठ्यक्रम में बारबार परिवर्तन नही किया जाए और शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नही लगाया जाए। संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेशचंद्र अंसल ने बताया कि संगठन द्वारा उठाई मांगों को शिक्षा के अधिकार नियम 2009 में दूसरा संसोधन करते हुए कक्षा 5वीं एवं 8वीं परीक्षा बोर्ड करने का विधेयक लोकसभा द्वारा 2018 में पास कर दिया गया था और अब 3 जनवरी 2019 ही यह विधेयक राज्यसभा में भी पारित कर दिया गया है जिससे निश्चित ही शिक्षा में गुणवत्ता सुधार होगा।
अभी जारी रहेगा संघर्ष
कक्षा 5वीं और 8वीं को बोर्ड किए जाने पर चाणक्य शिक्षक अध्यापक संघ के पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया है। वहीं संघ प्रांतीय अध्यक्ष श्री अंसल ने कहा है कि शिक्षा की बेहतरी को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होने कहा कि संसद में लंबित आरटीई अधिनियम 2018 जिसमें कक्षा पांचवी एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा करने का नियम है उसे राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया है। उन्होने बताया कि चाणक्य शिक्षक अध्यापक संघ द्वारा समय-समय पर इस हेतु ज्ञापन देकर जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया था जिसके परिणाम स्वरूप इस विधेयक को अति शीघ्र मंजूरी मिली है। इसीके साथ उन्होने कहा कि संगठन आरटीई की धारा 4 एवं धारा 16 को भी संशोधित करने हेतु प्रयास करता रहेगा, ताकि प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार किया जा सके। इसके साथ ही शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कराने हेतु भी संघर्ष किया जाता रहेगा। 
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